चूरू. राजकिया भारतीया अस्पताल परिसर में देर रात जबरदस्त हंगामा हुआ एक महिला और उसके नवजात बच्चे की तबीयत खराब होने पर बीकानेर रैफर करने के बाद अस्पताल में मौजूद एक अन्य मरीज के परिजनों ने हंगामा कर दिया । उन्होंने शक जताया कि महिला को कोरोना संक्रमण होने के चलते बीकानेर रैफर किया गया है अस्पताल के मौके पर मौजूद स्टाफ ने उन्हें लाख समझाने की कोशिश की , लेकिन वे नहीं माने । इसी दौरान किसी ने उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ को फोन कर दिया , जिन्होंने कलेक्टर संदेश नायक को इस बारे में जानकारी दी । कलक्टर ने हस्तक्षेप करते हुए मौके पर अस्पताल के वरिष्ठ लोगों को भेजा , जिन्होंने अस्पताल को सैनेटाइज करने की कार्रवाई की और हंगामा कर रहे लोगों को शांत किया । इस दौरान करीब दो - ढाई घंटे तक अफरा तफरी का माहौल रहा ।
जानकारी के मुताबिक , हंगामा रात करीब पौने ग्यारह बजे के आसपास शुरू हुआ । बताया जाता है कि चूरू शहर के ही रहने वाले एक शख्स के किसी रिश्तेदार के बच्चे की तबीयत खराब हुई । बच्चा
एमसीएच में भर्ती था । बच्चे की तबीयत खराब होने के बाद उस व्यक्ति ने यह कहते हए हंगामा करना शुरू कर दिया कि उसके बच्चे की हालत इसलिए खराब हुई है क्योंकि उसे एक कोरोना पीड़ित महिला के साथ वार्ड में रहना पड़ा । उसका कहना था कि रतनगढ़ से आई इस गर्भवती महिला ने इसी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया । उसे कई दिनों से तेज बुखार आ रहा था । महिला का कोविड - 19 का टेस्ट भी कराया गया , लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही उसे बीकानेर रैफर कर दिया गया । उसने शक जताया कि महिला कोरोना से पीड़ित थी और उसके चलते ही उसके बच्चे की भी तबीयत खराब हो रही है । बताया जाता है कि राठौड़ के फोन करने के बाद कलक्टर ने डीबीएच के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ . एफएच गौरी को फोन कर मौके पर पहुंचने और हालात को संभालने के लिए कहा । डॉ . गौरी पहुंचे और उन्होंने भी परिजनों को समझाने की कोशिश की । डॉ . गौरी के मुताबिक रतगनढ़ की उस महिला से पैदा हुए बच्चे की हालत गंभीर होने के चलते बच्चे को रैफर किया गया , जबकि महिला बच्चे के साथ ही जाने को इच्छुक थी , इसलिए उसे जाने दिया गया । कोविड - 19 जैसे संक्रमण से उसके ग्रसित होने जैसी कोई बात नहीं है । उसका टेस्ट करवाया जा चुका है और रिपोर्ट नेगेटिव आ चुकी है ।
एमसीएच में भर्ती था । बच्चे की तबीयत खराब होने के बाद उस व्यक्ति ने यह कहते हए हंगामा करना शुरू कर दिया कि उसके बच्चे की हालत इसलिए खराब हुई है क्योंकि उसे एक कोरोना पीड़ित महिला के साथ वार्ड में रहना पड़ा । उसका कहना था कि रतनगढ़ से आई इस गर्भवती महिला ने इसी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया । उसे कई दिनों से तेज बुखार आ रहा था । महिला का कोविड - 19 का टेस्ट भी कराया गया , लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही उसे बीकानेर रैफर कर दिया गया । उसने शक जताया कि महिला कोरोना से पीड़ित थी और उसके चलते ही उसके बच्चे की भी तबीयत खराब हो रही है । बताया जाता है कि राठौड़ के फोन करने के बाद कलक्टर ने डीबीएच के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ . एफएच गौरी को फोन कर मौके पर पहुंचने और हालात को संभालने के लिए कहा । डॉ . गौरी पहुंचे और उन्होंने भी परिजनों को समझाने की कोशिश की । डॉ . गौरी के मुताबिक रतगनढ़ की उस महिला से पैदा हुए बच्चे की हालत गंभीर होने के चलते बच्चे को रैफर किया गया , जबकि महिला बच्चे के साथ ही जाने को इच्छुक थी , इसलिए उसे जाने दिया गया । कोविड - 19 जैसे संक्रमण से उसके ग्रसित होने जैसी कोई बात नहीं है । उसका टेस्ट करवाया जा चुका है और रिपोर्ट नेगेटिव आ चुकी है ।

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