चूरू . लॉकडाउन के बाद अब किसानों की हालत खराब है , लेकिन उनकी बात को सुनने वाला कोई नहीं है । ऐसे में अन्नदाता चुपचाप हालातों से संघर्ष करने को मजबूर है । हालत यह है कि क्षेत्र में रबी की फसल कट चुकी है । लेकिन खरीदार नहीं मिल रहा है । सरकार की ओर से भी राहत देने के लिए फिलहाल कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए है । किसान राजेश ने बताया कि लगभग किसानों ने बैंक व साहुकार से रुपए लेकर फसल तैयार की फसल कट चुकी है , लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे हैं । ऐसे में घर पर अनाज रखा हुआ है , लेकिन भंडारण की उचित व्यवस्था नहीं है । दूसरी तरफ मौसम भी लगातार खराब होने के कारण कटा अनाज खराब होने का खतरा भी सता रहा है । उन्होंने बताया कि तकाजे के लिए बैंक व साहुकारों के फोन भी आना शुरू हो गए हैं । शीघ्र ही समाधान नहीं होने पर कर्जा चुकाना मुश्किल काम हो जाएगा । किसानों ने बताया कि खरीफ की बुवाई का समय भी नजदीक आने लगा है , वहीं बीज , खाद खरीदने के लिए किसान के पास रुपए नहीं है । मंडियों में खरीद की व्यवस्था अबतक शुरू नहीं हो पाई है , इसको लेकर चिंता बनी है कि घर में बैठकर परिवार की आवश्यकताओं को किस तरह पूरा करेगा । उन्होंने बताया कि रबी फसल के लिए बैंकों से लिया कर्जा चुका पाना अभी मुश्किल है ।
खरीफ की फसल के लिए अब साहुकार के पास से ब्याज पर रुपए उधार लेकर बुवाई एकमात्र विकल्प बचा हुआ है । किसानों ने बताया कि मंडी बंद होने से सब्जी के भाव नहीं मिल पा रहे हैं । उन्होंने बताया कि बिना रयायनिक खाद का उपयोग कर सब्जियां उगाते हैं । लेकिन अब मेहनत के मुकाबले भाव नहीं मिल पा रहे हैं । ऐसे में अब कम ही क्षेत्र में सब्जी लगाई है । इसकी जगह पर खरीफ फसल की बुवाई करने की बात कही । उन्होंने बताया कि किसान की हालत दयनीय है । रबी की फसल का खरीदार नहीं मिलने से अब बड़े किसानों से बीज लेना मजबूरी है ।
खरीफ की फसल के लिए अब साहुकार के पास से ब्याज पर रुपए उधार लेकर बुवाई एकमात्र विकल्प बचा हुआ है । किसानों ने बताया कि मंडी बंद होने से सब्जी के भाव नहीं मिल पा रहे हैं । उन्होंने बताया कि बिना रयायनिक खाद का उपयोग कर सब्जियां उगाते हैं । लेकिन अब मेहनत के मुकाबले भाव नहीं मिल पा रहे हैं । ऐसे में अब कम ही क्षेत्र में सब्जी लगाई है । इसकी जगह पर खरीफ फसल की बुवाई करने की बात कही । उन्होंने बताया कि किसान की हालत दयनीय है । रबी की फसल का खरीदार नहीं मिलने से अब बड़े किसानों से बीज लेना मजबूरी है ।

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