रविवार को साल 2020 का पहला सूर्य ग्रहण। इस दौरान राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड के कई हिस्सों में रिंग ऑफ फायर दिखा. वहीं देश के अन्य हिस्सों में आंशिक और वलयाकार सूर्य ग्रहण दिखाई दिया।
रविवार को हुआ 2020 का पहला सूर्य ग्रहण। इस खगोलीय घटना का ज्योतिषियों का आकलन अच्छा संकेत नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि ग्रहण का ऐसा संयोग वर्ष 1962 के भीतर बना था, जब तीन ग्रहणों की शुरुआत एक के बाद एक हुई थी, कुछ ऐसा ही इस समय भी हो रहा है।
ग्रहण के दौरान ग्रहों का संयोग
ज्योतिषियों ने कहा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रह नक्षत्रों के इस सयोंग से दुनिया के भीतर बड़े पैमाने पर आपदा होगी। प्राकृतिक आपदाएँ आएंगी और यह सूर्य ग्रहण हर जगह तबाही का कारण बन सकता है।
रविवार को लगा यह सूर्य ग्रहण भी काफी लंबा था। भारत के अलावा सूर्य ग्रहण कांगो, सुडान, इथियोपिया, यमन, साउदी अरब, पाकिस्तान और चीन में दिखाई दिया. 21 जून को लगा यह ग्रहण वलयाकार था। यह देशभर में आंशिक और वलयाकार ग्रहण के रूप में दिखाई दिया। पीटीआई के मुताबिक, यह ग्रहण हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा में सुबह 10 बजकर 20 मिनट से दोपहर 2 बजकर 20 मिनट तक रहा।
आपको बता दें कि आंशिक सूर्य ग्रहण सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर शुरू हुआ। वहीं पूर्ण सूर्य ग्रहण सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा. पूर्ण सूर्य ग्रहण की अवस्था दोपहर को 2 बजकर 2 मिनट तक रहेगी. वहीं आंशिक सूर्य ग्रहण की अवस्था दोपहर 3 बजकर 4 मिनट पर खत्म होगी. इस कारण यह सूर्य ग्रहण 6 घंटे तक रहेगा
यह भी पढ़े:- पिछले 24 घंटों के भीतर, देश मे कोरोना के सबसे ज्यादा 14516 नए मामले सामने आए हैं।
58 साल बाद 1962 जैसा संयोग
58 साल पहले 1962 में 17 जुलाई को मांद्य चंद्रग्रहण, 31 जुलाई को सूर्य ग्रहण और 15 अगस्त को दोबारा मांद्य चंद्रग्रहण हुआ था.बता दें कि 1962 ही वो साल था जब चीन ने धोखे से भारत पर आक्रमण किया था और इस बार भी लद्दाख के गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच खूनी जंग हुई है.

Post a Comment